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के. वी. कृष्णा प्रसाद – एक प्रतिष्ठित कर्नाटक शास्त्रीय गायक

कृष्णा-प्रसाद

के. वी. कृष्णा प्रसाद एक प्रसिद्ध कर्नाटक शास्त्रीय गायक हैं, जिनका जन्म 29 जनवरी 1988 को बेंगलुरु, कर्नाटक में हुआ था। हालांकि, उनके परिवार की जड़ें कर्नाटक के पवित्र नगर श्रृंगेरी में हैं। उन्होंने 8 वर्ष की आयु में संगीत की शिक्षा लेना प्रारंभ किया। उनके शुरुआती गुरु विदूषी गीता, विदूषी स्वर्णलता और विद्वान एम. वी. रघुराम थे। वर्तमान में वे गानकलाभूषण विद्वान आर. के. पद्मनाभ के सान्निध्य में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

शिक्षण और संगीत प्रचार

कृष्णा प्रसाद ‘श्री विद्या कला केंद्र’ नामक एक संगीत विद्यालय के प्रमुख हैं, जहां वे 100 से अधिक छात्रों को कर्नाटक शास्त्रीय संगीत सिखा रहे हैं। वे ‘गोष्ठी गायन’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हैं, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को साप्ताहिक कक्षाओं के माध्यम से संगीत सिखाया जाता है। इसके अलावा, वे ‘गाना ज्ञान सुधा’ नामक एक विशेष संगीत प्रस्तुति का संचालन करते हैं, जिसमें प्रत्येक कृति के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है।

संगीत योगदान और रचनाएँ

कृष्णा प्रसाद ने ‘पद्मनाभ प्रिया’ नामक एक नया राग और उस पर आधारित तिलाना की रचना की है, जिसे उन्होंने अपने गुरु आर. के. पद्मनाभ को समर्पित किया। उन्होंने ‘संध्या राग’ नामक एक प्रसिद्ध ऑडियो बुक के लिए संगीत और पृष्ठभूमि स्कोर भी तैयार किया है, जिसे आ. ना. क्रु द्वारा लिखा गया है।

पुरस्कार और सम्मान

संगीत के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें शामिल हैं:

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता पुरस्कार (2013) – सुनादा सांस्कृतिक अकादमी

शंकर प्रशस्ति (2012) – जालाहल्ली शंकर मठ

संगीत विशारद (2010) – कोलार संगीत सभा

नादज्योति पुरस्कार – नादज्योति संगीत सभा

अनन्या युवा पुरस्कार (2009) – अनन्या सांस्कृतिक अकादमी

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